सुंदर विचार - Sunder Vichar In Hindi - अच्छे विचार
सुंदर विचार - Sunder Vichar In Hindi - अच्छे विचार
ह्रदय भी किसी मंदिर से कम नही...!
रास्ते पर गति की सीमा है...
बैंक में पैसों की सीमा है...
परीक्षा में समय की सीमा है...
परंतु हमारी सोच की कोई सीमा नहीं है
इसलिए सदा श्रेष्ठ सोचें और श्रेष्ठ पाएं...!
अरमान वहां तक ही अच्छे हैं...
जहां तक स्वाभिमान बेचने की
जरूरत ना पड़े...!
जरूरत ना पड़े...!
महाभारत से सबक
युधिष्ठिर - की तरह जुआ मत खेलो...!
कर्ण - की तरह दुष्ट का अहसान मत लो...!
धुतराष्ट्र - की तरह पुत्र के मोह में मत पड़ो...!
कुन्ती - की तरह अनुचित प्रयोग मत करो...!
द्रोपदी - की तरह अनुचित जगह पर मत हँसो...!
पाण्डु - की तरह काम के वशीभूत मत बनो...!
दुर्योधन - की तरह अनधिकार हठ मत पालो...!
भीष्म - की तरह अनुचित प्रतिज्ञाओं में मत बँधो...!
दुःशासन - की तरह नारी का अपमान मत करो...!
अश्वत्थामा - की तरह अनियन्त्रित मत हो जाओ...!
शान्तनु - की तरह काम में आसक्त मत हो जाओ...!
गान्धारी - की तरह नेत्रहीन का अनुसरण मत करो...!
परीक्षित - की तरह क्रोध में अनुचित कार्य मत कर बैठो...!
द्रोणाचार्य - की तरह अर्धसत्य पर विश्वास मत करो...!
शल्य - की तरह हतोत्साहित करने वाले की संगति में मत रहो...!
अवश्य करो...
कर्ण - की तरह दुष्ट का अहसान मत लो...!
धुतराष्ट्र - की तरह पुत्र के मोह में मत पड़ो...!
कुन्ती - की तरह अनुचित प्रयोग मत करो...!
द्रोपदी - की तरह अनुचित जगह पर मत हँसो...!
पाण्डु - की तरह काम के वशीभूत मत बनो...!
दुर्योधन - की तरह अनधिकार हठ मत पालो...!
भीष्म - की तरह अनुचित प्रतिज्ञाओं में मत बँधो...!
दुःशासन - की तरह नारी का अपमान मत करो...!
अश्वत्थामा - की तरह अनियन्त्रित मत हो जाओ...!
शान्तनु - की तरह काम में आसक्त मत हो जाओ...!
गान्धारी - की तरह नेत्रहीन का अनुसरण मत करो...!
परीक्षित - की तरह क्रोध में अनुचित कार्य मत कर बैठो...!
द्रोणाचार्य - की तरह अर्धसत्य पर विश्वास मत करो...!
शल्य - की तरह हतोत्साहित करने वाले की संगति में मत रहो...!
अवश्य करो...
अभिमन्यु - की तरह वीर बनो...!
कृष्ण - की तरह धर्म का साथ दो...!
विदुर - की तरह स्पष्टवादी और शुभचिंतक बनो...!
घटोत्कच - की तरह धर्मकार्य में सहर्ष बलिदान दो...!
अर्जुन - की तरह अपनी बागडोर भगवान के हाथों में सोंप लो...!
कृष्ण - की तरह धर्म का साथ दो...!
विदुर - की तरह स्पष्टवादी और शुभचिंतक बनो...!
घटोत्कच - की तरह धर्मकार्य में सहर्ष बलिदान दो...!
अर्जुन - की तरह अपनी बागडोर भगवान के हाथों में सोंप लो...!
जिसकी गति और मती अर्जुन की तरह है उनका रथ आज भी
भगवान कृष्ण ही चलाते हैं...!
भगवान कृष्ण ही चलाते हैं...!
मन की संतुष्टि के लिए
अच्छे काम करते रहना चाहिए.
लोग चाहे तारीफ करें या ना करें
क्योंकि... कमियां तो लोग
भगवान में भी निकलते हैं.
अच्छे काम करते रहना चाहिए.
लोग चाहे तारीफ करें या ना करें
क्योंकि... कमियां तो लोग
भगवान में भी निकलते हैं.
जय श्री कृष्ण

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